अपने भाई की हत्यारों को सजा दिलाने के लिए आशुतोष कुमार न्यायालय का दरवाजा खटखटआ रहे हैं

 झारखंड सरकार हत्यारों को पनाह दे रही है बचा रही है अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है

Ashutosh Kumar 


साथियों! मेरे छोटे भाई दिवंगत आलोक कुमार की हत्या हुए आज 24 दिन बीत गए लेकिन नामजद अभियुक्तों की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। प्रशासन से सवाल करने पर आज भी एक ही जवाब मिलता है कि जांच चल रही है जबकि CCTV फुटेज में सब कुछ स्पष्ट दिख रहा है। CCTV फुटेज में मारपीट करना, पिस्टल लहराना/भिड़ाना, गाली गलौज करना सब कुछ स्पष्ट दिख रहा है, उसके बाद भी देवघर प्रशासन और झारखंड सरकार का रवैया इस प्रकार है। यदि CCTV फुटेज नहीं होता तो शायद स्थानीय प्रशासन FIR तक दर्ज नहीं करती। देवघर के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद भी अपराधियों के खिलाफ ना तो अब तक कुर्की वारंट जारी की गई और ना ही गिरफ्तारी को लेकर दबिश बनाया गया उल्टा लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे मेरे सहित 15 नामजद लोगों पर 17 झूठे और फर्जी धाराओं के तहत देवघर प्रशासन द्वारा मुकदमा दर्ज कर दिया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि दिवंगत आलोक के हत्यारों को बचाने में ना केवल स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी बल्कि झारखंड सरकार भी लगी है। अब मेरे पास न्यायालय की शरण में जाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। लेकिन एक बात साफ कर दूं कि चाहे हमें पूरी उम्र इस लड़ाई को लड़नी पड़े, हम लड़ेंगे और किसी को भी बख्शने नहीं जा रहे हैं। 
05 जनवरी को रांची उच्च न्यायालय खुल रहा है। हम इस घटना में संलिप्त और हत्यारों को बचाने में अपनी जमीर बेच चुके सबों के खिलाफ Criminal Writ Petition दर्ज करवाऊंगा। जिसके तहत नगर थानाध्यक्ष (देवघर), SDPO सदर (देवघर), SDM (देवघर) SP (देवघर), DGP (झारखंड) और झारखंड सरकार को अभियुक्त बनाया जाएगा क्योंकि मेरी नजर में इस तरह की जघन्य हत्या में शामिल अपराधियों को संरक्षण देने में जिस प्रकार से झारखंड प्रशासन और सरकार ने अपना जमीर गिरवी रखा है, उसे देख कर यह स्पष्ट होता है कि हत्यारों से कम दोषी ये लोग नहीं हैं। इसके अलावा शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल सभी नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ किए गए फर्जी मुकदमे को निरस्त करने हेतु भी Petition दायर किया जाएगा। इस घोर अन्याय के विरुद्ध देवघर कोर्ट, रांची हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के सैकड़ों जाने माने अधिवक्ता हमारे साथ खड़े हैं। इनके अलावा देश भर के समाजसेवी और हमारे लाखों शुभचिंतक साथी भी मजबूती से हमारे साथ खड़े हैं।
मुझे न्यायालय पर भरोसा है, हमें न्याय जरूर मिलेगा।
अंत में फिर से दोहरा रहा हूं, छोडूंगा किसी को नहीं चाहे इसके लिए मुझे आजीवन न्यायालय के दरवाजे पर बैठने पड़े।

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