देवघर (झारखंड) में भाजपा नेता आशुतोष कुमार के भाई आलोक कुमार की मौत को लेकर हुए विरोध‑प्रदर्शन
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
देवघर में आशुतोष कुमार ने अपने भाई की मौत को साधारण हादसा नहीं मानते हुए पुलिस पर FIR में छेड़छाड़ और साजिश का आरोप लगाया
![]() |
| भाजपा नेता आशुतोष कुमार |
देवघर (प्रतिनिधिनगर) में आलोक कुमार नाम के व्यक्ति की मौत का मामला सामने आया। आलोक की मौत कार से धक्का लगने के कारण हुई थी, पर परिवार इसे साधारण हादसा नहीं मानता। घटना बाजला चौक के पास मॉडर्न पब्लिक स्कूल के समीप हुई थी। मृतक के भाई आशुतोष कुमार ने मामला उठाया। आशुतोष आमतः BJP/भूमिहार नेता के रूप में पहचाने जा रहे हैं। उन्होंने पुलिस जांच पर गंभीर आरोप लगाए। मुख्य आरोप यह है कि पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) में छेड़छाड़ की। FIR में घटना की तारीख भी गलत लिखी गई है, जो संदिग्ध माना जा रहा है। आशुतोष का कहना है कि यह साधारण मौत नहीं बल्कि साजिश अपराध है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस आरोपियों को बचा रही है। आशुतोष ने स्थानीय नगर थाना का रुख किया। उनके साथ सैकड़ों समर्थक थे। समर्थकों ने थाना के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में लोगों ने पुलिस की निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदर्शनकर्ता चाहते थे कि असली दोषियों को पकड़ा जाए। पुलिस की कार्यशैली पर स्थानीय तनाव बढ़ गया है। एक अलग रिपोर्ट में भी कहा गया कि FIR हत्या से पहले दर्ज हुई, जिससे जांच पर सवाल खड़े हुए। यह विवाद जनता में अविश्वास और गुस्सा पैदा कर रहा है। आशुतोष का कहना है कि पुलिस प्रशासन पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा। समर्थकों का आरोप है कि पुलिस किसी दबाव में काम कर रही है। विरोध के दौरान गाड़ियों और सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंपे गए। विरोध प्रदर्शन कुछ समय तक थाना के बाहर जाम की स्थिति पैदा कर गया। स्थानीय लोग बोले कि अगर सच सामने नहीं आया तो प्रदर्शन और बढ़ेगा। यह मामला अब स्थानीय राजनीति में भी चर्चा का विषय है। जनता का कहना था कि अगर पुलिस ने पहले शिकायत पर कार्रवाई की होती, तो यह घटना नहीं होती। एक अन्य स्थानीय मामला (विनोद कुमार मंडल) में भी परिजनों ने थाना गेट पर शव रखकर प्रदर्शन किया था, जिससे इलाके में आक्रोश का माहौल है। इन विरोधों के बीच प्रशासन पर जवाबदेही की मांग तेज़ हुई है। आशुतोष ने कहा कि पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों से कैद है। कई लोग यह भी दावा कर रहे हैं कि पुलिस आरोपियों को बचाने के लिए FIR बदल रही है। स्थानीय व्यापार और आवाजाही पर विरोध का प्रभाव पड़ा है। पुलिस फिलहाल मामले की जांच जारी है, लेकिन परिणाम स्पष्ट नहीं हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्यशैली पर तीखे नारों की भी समीक्षा की। समाजवादी और अन्य नेताओं ने भी इस मामले पर टिप्पणी की है। विरोध में कहा गया कि अगर गैर‑भेदभाव जांच नहीं हुई तो न्याय नहीं मिलेगा। आशुतोष ने कहा कि थाना प्रशासन निष्पक्ष तक नहीं पहुंचा। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पुलिस हाथापाई की धमकी के आरोपों को भी उठाया। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस के हक में बयान लेने में देरी हुई। यह मामला अब सोशल मीडिया पर भी काफी शेयर हो रहा है। विरोध प्रदर्शन की वीडियो फुटेज भी वायरल हुई है। स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है। पुलिस ने अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं रिपोर्ट की है। समर्थकों का आरोप है कि अगर सत्ताधारी दबाव नहीं मिलेगा, तो जांच में बदलाव हो रहा है। गांव और शहर के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ा है। यह मामला अब कानूनी रूप से भी अदालत तक पहुँच सकता है। स्थानीय लोगों ने कहा कि अगर पुलिस सच्चाई नहीं बताएगी, तो बड़ा आंदोलन होगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तर के निरीक्षक को बुलाए जाने की मांग है। यह मामला राज्य के जनहित का विषय बन चुका है। लोगों ने कहा कि इंसाफ सबके लिए समान होना चाहिए। विरोध के दौरान नारेबाजी व प्रदर्शन जारी रहा। अब पूरा ध्यान पुलिस जांच के निष्कर्ष पर है कि सच्चाई सामने आती है या नहीं।
![]() |
राहुल चंद्रवंशी |
.jpg)
.jpg)
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें